अक्नी व्ल्गारिस के बारे में मैंने कहा था कि
यह समस्या उम्र के साथ चलति है 'तो हम ऐसा भी मान सकते हैं कि यह किसि तरह कि बिमारी न होकर मात्र उम्र के परिवतॅन का असर है'और निश्चित रुप से 'इसे खत्म नहीं किया जा सकता है बल्कि ईलाज से इसे हम सिर्फ नियन्त्रित ही कर सकते ; जब ये है कि इलाज से खत्म नहीं हो सकती ओर अगले ५-७ साल तक भी ये निकल सकति है तो ईलाज कि क्या आवश्यकता है॰ईलाज की आवश्कता तो फिर भि है क्यों कि यदि ईलाज नहीं लेंगे तो जो फुसिंयां हो रही हैं वे सब कि सब निशान छों,ङने के बाद ही ठीक होति हैं॰और जब तक ये निकलेंगी निशान छोङती जायेंगि .ओउर हमें इससे हमारा चेहरा खराब होने कि सम्भ्वाना बढ़ जाती है इसलिये हमें इलाज़ समय पर ही चालू कर देना चाहिऐ .जिससे हमारा चेहरा सुंदर बना रहे .ओर सबसे बड़ी बात ये है कि जो दवाईयां इसके लिए काम ली जाती हैं वो सौंदर्य प्रसाधन कि ह्बी तरह होती है .इसलिये शुरू से ही एक बात दिमाग में रखें कि हम इलाज़ नहीं बल्कि सौंदर्य परामर्श ले रहें हैं .ओउर ये मानसिकता रखना आवश्यक है क्यों कि लंबे समय तक इलाज़ लेना ही हमारे मन को बीमार कर देगा।
सबसे बड़ी भ्रांति जो पिम्प्लेस के इलाज़ में होति है कि मरीज़ के खाने पिने पर बहुत se प्रतिबंध लगा दिए जाते हैं जो एकदम गलत है .अचार खाना ,तली चीज़े नहीं खाना ,मसालेदार चीज़े नहीं खाना ,ये सब गलत है ओउर इन सब चीजों का बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं होता ,बल्कि मरीज़ परेशां होकर इलाज़ ही बन्द कर देता है.इसलिये किसी अच्छे स्किन स्पेसिअलिस्ट से सम्पर्क कर इन सब परेसनियों सेदूर रहते हुए आराम से इलाज़ लिया जा सकता है.अगले अंक में इलाज़ के प्रकारों पर चर्चा करंगे.
1 comment:
आपके हर लेख का इंतजार रहेगा.
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-- शास्त्री जे सी फिलिप
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