Wednesday, October 31, 2007

जूँ

 

जूँएं एक 3-4  mm  का छोटा सा कीट है  जो तीन प्रकार की होती है

  1. pediculosis humanus capitis -इसका जीवन काल करीब 40 दिनों का होता है,और अपने जीवन काल में ये 400 के आस पास अंडे देती है,याने प्रतिदिन 7-10 .ये अंडे जिन्हें हम लीख के नाम से जानते है.ये लीख अब एक चिपकाने वाले पदार्थ से बाल से चिपक जाती है,अंडा  अब 8 दिन में पककर अगले 10 दिन में पूरी जूँ बन जाती है और उसके बाद ये जो धमाचौकङी करती है तो हम सब कूदने लगते है
  2. pediculosis humanus humanus--यह शरीर पर पाई जाने वाली जूँ है ,इसका अंडा मानव शरीर पर न रहकर कपङे के रेशों के साथ चिपका रहता है.ऊपर से देखने पर यह बालों की जङों में घुसी हुई दिखती है.यह भी जबरदस्त खुजली का कारण है.चूंकि यह कपङों से जुङी रहती है इसलिये जो लोग एक दूसरे के कपङे पहन लेते हैं उनमें ये ज्यादा होती है.
  3. pthiris pubis -- मुख्यतया पेडू के नीचे वाले हिस्से में ये होती है,(pubic area)इसके अतिरिक्त ये ,काख ,आंख कीभौहों ,पलकों आदि को भी प्रभावित कर  सकता है,

जूँ किसी भी प्रकार की हो इसका मुख्य लक्षण खुजली चलना है ,और कई बार खुजली इतनी ज्यादा होती है कि खुजली करने से घाव हो जाते हैं.12-13 साल से ऊपर के बच्चे और खासकर लङकियां जिनमें बार बार सिर में फोङे फुंसियां होते हैंउनमें अधिकतर में जूँएं ही प्रमुख कारण होती हैं.परिवार में एक व्यक्ति के जूँ होने पर सब लोगों के होने की आशंका रहती है इसलिए जल्दी से जल्दी इनका उपचार करना चाहिए.

उपचार--- उपचार में पहले तो यदि किसी प्रकार के फोङे फुंसी हो रहें हैं तो पहले एंटीबायॉटिक द्वारा उसका उपचार किया जाता है,उसके बाद ही जूँओं की कोई दवाई लगानी चाहिए.जूँऔं के उपचार के लिए gamma banzene hexachloride नामक औषधी जो कि दवाई की दुकान पर ascabiol,scabimide,GBHC,आदि नामों से मिलती हैं इसके अलावा   permethrine 1 % जो की perlice, permite,permaridआदि नामों से मिलती है.इनमें से की यदि इनमें से नीचे रेखांकित औषधियां विश्व के हर देश जैसे अमेरिका ,इंग्लैंड हो या हिंदुस्तान सभी जगह इसी नाम से बिकती है.

दवाई को जो की क्रीम या लोशन के रूप में होती है उसे हाथ में लेकर सिर में या शरीर पर हैं तो प्रभावित स्थान पर दवाई लगाकर करीब 2 घंटे तक रखें.हो सके तो सिर में कपङा बांध लें.2 घंटे बाद सिर को किसी साधारण शैंपू से अच्छी तरह से धो लें और कंघी कर लें सारी जूंएं कंघी के साथ लगकर बाहर निकल जाएँगी एक साथ.अब चूंकी दवाई लगने से मात्र जीवित जूँएं ही साफ होती है सप्ताह भर में लीखं जूँएं बन जाती हैं तो सप्ताह भर बाद एक बार फिर से यह प्रक्रिया दोहरानी चाहिये.

सावधानियां--

  1. परिवार में जितने लोगों को जूँएं हैं सब का उपचार एक साथ हो.
  2. कपङे बिस्तर आदि धूप में लगाएं या गर्म पानी में धोँएं
  3. गर्भवती महिला या एक साल के छोटे बच्चे में gamma banzene hexachloride काम में न लें
  4. ये औषधियां सुरतक्षित तो हैं पर विषैली भी हैं इसलिए आंखों से और मुंह से बचाव करके ही लगाई जाएं
  5.  और ठीक हो जायें तो चिकित्सक को धन्यवाद दिया जाये.

जूँ --शायद ये आज तक की किसी भी पोस्ट का सबसे छोटा शीर्षक होगा ,पर इससे बङा हो भी नहीं सकता था, 

Monday, October 29, 2007

ये समाचार चैनल या पंचकूटे की भाजी...

फळी, काचरा,टमाटर.मिर्ची,कमल गट्टा,सांगरी,टिंडे,भिंडी याने बची खुची सारी सब्जियों का बङा स्वादिष्ट मिश्रण जिसे राजस्थान में  पंचकूटे की भाजी कहते हैं बहुत ही स्वादिष्ट होती है पर कोई ये पूछे की उस भाजी में सही सही क्या है,या कि किस चीज की भाजी है तो बताना मुश्किल है.वैसे ही यदि  यह देखा जाये कि आज तक या के स्टार न्यूज या के जी न्यूज या के ................क्या हैं.... समाचार चैनल है.......शायद ,मनोरंजन चैनल है.सोचना पङेगा,खेल चैनल है.....पता नहीं.क्यों कि यदि दैश में कोई महत्व पूर्ण घटना घटित हुई और आप टी वी चालु करके देखिये किसी पर नच बलिए कहीं सास बहु के सीरियलों का घटिया सा चूं चूं का मुरब्बा जैसा कोई प्रोग्राम,या फिर नित रोज होने वाले किसी फिल्मी स्टेज कार्यक्रम की झलकियां ही देखने को मिलती है.पता नहीं या तो इन्हे अपनी प्रतिभा पर भरोसा नहीं या देश की जनता को निरी बेवकूफ समझ रखा है,भई इन सब बातों में सर खपाने की बजाय यदि कोई ढंग का सा वृत्त चित्र भी दिखायें तो ,याके कोई वार्ता .पर नहीं अरे भाई हमारी नहीं तो अपनी इज्जत का तो ख्याल करो आप लोग पत्रकार हो यार.

याद आते हैं वे दिन जब अपनी बैठक में बैठकर हम दैश के हर अभयारण्य मे घूम लेते थे,या देश की शिक्षा व्यवस्था पर धीर गंभीर चिंतन सुनते थे.पर आजकल  कभी परिचर्चा दिखायी भी तो आने वाला मेहमान विद्वान कम विवादित ज्यादा होता है.पर कोई उपाय नहीं तब तक समाचार जानने हों तो दूसरे दिन के समाचार पत्र की प्रतीक्षा करो और तब तक पंचकूटे की सब्जी खाओ,

Friday, October 26, 2007

डैंड्रफ या रूसी

 यह एक सर्व सामान्य समस्या है जिसमें हमारे बालों में छोटे छोटे सफेद सफेद छिलके बालों में हो जाते है थोङे तो सामान्यतया हर किसी के होते हैं पर जब ये बढ जाते है तो बङी समस्या हो जाती हैं,तब ये बालों के साथ साथ सिर की त्वचा को भी प्रभावित करते हैं तो वहां तेज खुजली के साथ हल्की सूजन आ जाती है.इसके साथ ही यह रूसी चेहरे पर  जैसे भौहें ,पलकें ,ठुड्डी के ऊपर.कान के पीछे,नथुनों के बगल में जमा होकर seborrhic dermstitis का रूप ले लेती है.तब दूरदर्शन पर आने वाला वह विज्ञापन स्मरण करें जिसमें नायक नायिका के सामने खङा बार बार सर खुजलाता है ,यानि असहनीय खुजली होती है.

कारण---- रूसी का प्रमुख कारण pityrosporum  ovale/mellasezia furfur नामक कवक जो  हमारे शरीर पर सामान्यतया उपस्थित होता है ,है.सामान्य तया यह किसी तरह की कोई बीमारी  पैदा नहीं करता पर जब यह बढ जाता है तब ये सारी समस्याएं प्रारंभ होती हैं.

निवारण  ----उपचार दो चीजों को ध्यान में रखकर किया जाता है1-रूसी का उपचार2-इसके साथ होने वाली seborrhic dermstitis का उपचार.

रूसी के उपचार के लिए कवक रोधी (antifungal)शैंपू  बहुत उपयोगी होते हैं,जिनमें selenium sulphide,kotoconazole,ZPTO,miconazole आदि औषधियों युक्त कई सारे शैंपू  बाजार मेंNIZRAL,SCALP,CONADERM,ARCOLAN,SELSUN    आदि नामों से मिलते हैं.इनको नहाने के पांच मिनिट पहले बाल गीले कर लगायें और पांच मिनिट बाद बाल धोलें.चाहें तो इसके बाद कंडीशनर का उपयोग भी किया जा सकता है.तुरंत बाल धोने पर वांछित असर नहीं होता है.यह सब आप प्रारंभ के 5-7 दिन प्रतिदिन और उसके बाद सप्ताह में दो दिन करें जब तक की यह नियंत्रण में नहीं आ जाता है,चूंकी कारण हमारे शरीर पर ही उपस्थित है तो ये कल्पना की किसी भी उपचार से यह हमेशा के लिए समाप्त हो जायेगी गलत है इसलिए ये भी समझ लें कि जब यह समस्या होती है तो मात्र उपरोक्त उपचार करने से बङे आराम से ये सब नियंत्रित किया जा सकता है.और जब यह ठीक रहे तो फिर सामान्य शैंपू काम लिया जा सकता है,

DERMATITIS के उपचार के लिए शुरू के दस पांच दिन कोई हल्का स्टीरॉयड लोशन जैसे diprovate,desowen,लगाया जा सकता है.पर इससे ज्यादा न लगायें.

ये ध्यान रहे कि यह सब आपकी सामान्य जानकारी के लिये है यदि कुछ पूछना है तो आप मुझे मेल कर सकते हैं.

Monday, October 22, 2007

सर्दी के मौसम में त्वचा की सामान्य देखभाल

सर्दी का मौसम प्रारम्भ हो रहा है,कुछ विशेष प्रकार की समस्याएं इस मौसम में होती है.यदि पहले से ही कुछ सावधानी बरती जाए तो हमारी सर्दी भी सुहानी हो सकती है.प्रमुख रूप से निम्नांकित समस्याएं त्वचा में सर्दी के साथ प्रारम्भ होती है

  • एङी फटना
  • त्वचा का सूखना
  • सूर्य के प्रकाश से एलर्जी(photodermatitis)
  • रूसी(dendruff)

इनमें से हम एक एक कर इन समस्याओं के बारे में बात करेंगे.एङी फटने के बारे में हम पिछली पोस्ट में बात कर चुके हैं आशा है कुछ लोगों को इससे अवश्य ही लाभ होगा.आज हम सूखी तव्चा देगे xerosis के बारे में जानेंगे.

सितंबर के अंत से अक्टूबर के प्रारंभ तक कभी भी सर्दी का मौसम प्रारंभ हो सकता है,और जैसे ही वातावरण में हल्की सी भी ठंडक आने लगती हैत्वचा की चिकनाइ या नमी कम होने लगती है संभवतया मौसम के रूखे पन से ये संभव है,एक त्वचा विग्यानी होने के नाते में ये जानता हूं के सर्दी के प्रथम सप्ताह में ही किसी भी चर्म रोग चिकित्सक के पास पहुंचने वाले मरीज त्वचा के रूखे पन से परेशान होते हैं.इसके कारण फटी फटी सी लगती है,लाल हो जाती है, और जलन होने लगती है.कई बार खूजली करते करते मरीज बेहाल हो जाता है और इससे संक्रमण हौ फोङे फुसिं भी बन सकते हैं.छोटे बालकों में और खासकर जिनके ATOPY अर्थात  ALLERGY की समस्या रहती है उनमें तो ये बहुत ही गंभीर रूप से होती है.

उपचार--सामान्यतया हम इसे खुजली की समस्या मान लेते हैं और अधिकतर फैमिली फिजिशियन भी इसे इस रूप में ही देखते हैं,और  उपचार करनें का प्रयास करते हैं.त्वचा के रूखे पन की समस्या साधारण MOISTURISERS यथा PETROLRUM JELLY,GLYCERIEN, आदि चीजों से बङी आसानी से ठीक हो सकती हैं.कुछ सावधानियां जो लगाने के समय ध्यान रखनी चाहिए जैसे नहाने के बाद शरीर को तौलिये से ज्यादा न रगङें बल्कि हल्के हाथ से pet dry करें,जिससे कुछ नमी त्वचा में बाकी रहे.पैट्रोलियम जैली यथा वैसलीन जैसे पदार्थ त्वचा पर एक परत बना देते हैं जिससे नमी और चिकनाई शरीर पर बनी रहती है.GLYCERIENजैसे पदार्थ hygroscopic होते हैं जो त्वचा में उपलब्ध पानी के साथ जुङकर पानी को अधिकाधिक समय तक तव्चा में बनाए रखते हैं.

चेहरे पर लगाते समय सावधानी रखें कि चिकनाइ वाली चाज न लगाकर प्रकृति वाली 15 से 25 वर्श की उम्र में क्यों कि मुंहांसे होने का भी डर होता है इसलिए कम चिकनाई वाली चीज जैसे कोल्ड क्रीम का उपयोग करना चाहिए.और फिर भी यदि लगे की थोङी बहुत फुंसियां जैसी निकल रही है तो किसी तव्चा विषेशज्ञ से बात करनी चाहिए,

ध्यान रहे की यहां मैं जो भी बता रहा हुं वे सब सामान्य उपाय हैं जिनसे हम लाभ उठा सकते हैं यदि कुझ ज्यादा ही समस्या है तो विशेषज्ञ से निश्चित ही मिलें,कोई भी मॉश्चराइजर काम लें पर ध्यान रखें कि जहां ठीक ठाक ठण्ड पङती है वहां दो तीन महीने कम से कम लगाना पङता है इसलिये ज्यादा महंगा नहीं हो,ज्यादा सुगंध वाला नहीं हो अन्यथा एलर्जि शुरु हो जाती है,और नहाने के तुरंत बाद ईसे लगावें क्यों कि तब त्वचा में उपस्थित नमी  ही हमें लंबे समय तक ईस समस्या से बचाती है. आने वाली कङियों में हम उपर लिशी अन्य समस्याओं के बारे में बात करें यदो इसके बारे में कुछ और जानकारी करनी है तो आप मुझ मेव कर सकते हैं.

Thursday, October 11, 2007

जाके पैर न फटी बिवाई -----

वो क्या जाने पीर पराई.फटी एङियों के बारे में जिस भी कवि ने ये पंक्तियां लिखी हैं सत्य है, क्यों कि फटी बिवाईयों का दर्द इतना ज्यादा होता है कि जब मेरी मां इनके उपचार के लिए पिघला मोम डालती थी चिरी हुई एङियों में तो वो जलन भी कम लगती थी,
सर्दी के दिनों में एङी फटना एक सर्व सामानतय समस्या है.यदि इसका कारण और निवारण के बारे में थोङी जानकारी हो तो हम बङे आराम से इस समस्या पर पार पा सकते हैं सर्दी के मौसम में हमारी त्वचा की नमी और चिकनाई कम हो जाती हो और विषेशकर पांव की त्वचा, तो क्यों कि निरन्तर जमीन के संपर्क में रहने से और भी सूखनें लगती है और फटनें लगती है और फटी हुई त्वचा से जब मिट्टी आदि अंदर जाती है तो संक्रमण हो जाता है और दर्द होनं लगता है और उसी दर्द की अभिव्यक्ती ऊपर की गई हैकि जा के पैर न फटी बिव.........
उपचार---- बीमारी आपके समझ आ गई तो उपचार भी उतना ही आसान है.चिकनाई या के नमी की कमी से एङियां फटी तो चिकनाई अर्थात moisturizers का उपयोग इसका उपचार है, इसलिए पैट्रोलियम जैली,खोपरे का तेल,कोल्ड क्रीम इत्यादि अनेकानेक चीजें इसके काम ली जातीहै.थोङी बहुत समस्या हो तो इन सब चीजों से बङे आराम से काम चल जाता है पर चीरे ज्यादा हों तो कुछ विशष उपचार करना चाहिए.सबसे पहले रोज रात में सोते समय नमक के पानी से पांव धोएं (एक लीटर पानी में एक चम्मच नमक डालकर पानी को गुनगुना कीजिए)धोना क्या पानी के अंदर पांव को पांच मिनिट तक रखना है अब जो चीरे हैं उनमें gentian violet, नामक एक दवा जो कि चार पांच रूपये में किसि भी दवाई की दुकान पर मिल जाती है.चूंकि यह द्रव पदार्थ है इसलिए चीरों के अन्दर तक जाकर संक्रमण को बङी ही सफाई से खत्म कर देता है.जिससे चीरे तुरन्त ही साफ होने लगते हैं. इसके बाद salicylic acid युक्त क्रीम जो कि बाजार में विभिन्न कंपनियों की dipsalic,trivate mf ,betnovate –s आदि अनेकानेक नामों से मिलती है ,फटी एङियों में बहुत अच्छा काम करती है यह पाँव की नमी को बनाए रखने के साथ साथ रूखी त्वचा को भी साफ करती है जिसत फटी एङियां नरम होती हैं और साफ होने लगती हैं.अब एक बार ये सब ठीक होने पर साधारण पैट्रोलियम जैली से भी एङियां साफ रह सकती हैं और जरूरत पङने पर वापिस का , सेलिसाइलिक एसिड युक्त क्रीम का प्रयोग किया जा सकता है.
इस प्रकार इन साधारण उपायों से हम इस दर्द भरी समस्या से छुटकारा पा सकते हैं



सीकर वाली मां नाम सुनते ही मोटे मोटे कांच वाले चश्मे के पीछे से झांकती हुई वात्सल्य मयी पर तेज तर्रार आंखे याद आ जाती हैं,वो मेरी दादी थी .

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