Saturday, February 27, 2010

होली खेलते समय कुछ ध्यान देने योग्य बातें….

11682_BnHover  कैमिकल रंगों से होली नहीं खैलनी चाहिये …ये आपको तो पता है पर जरूरी थोङी है सामने वाले को भी पता है….यहां कुछ छोटी छोटी सामान्य सावधानियां है जिनसे हम होली के बाद अपनी त्वचा को काफी हद तक सामान्य रख पा सकते हं…

  1. जहां तक हो सके कैमिकल से बने रंगों का प्रयोग न करें….क्यों कि ये सामने वाले के साथ साथ आपकी त्वचा को भी नुकसान पहुंचा सकता है….
  2. holi_rangयथासंभव अपने बालों मैं तेल लगाकर रखें(आप छछूंदर न सही पर चमेली का तेल तो लगा ही सकते है) ….क्यों कि तेल लगे हुए बाल अपेक्षाकृत रंग कम पकङते हैं और बाद मैं धोने मैं आसानी रहती है….
  3. यदि संभव हो सकें तो अपने चर्म रोग विशेषज्ञ से पूछकर (बिना फीस वाला)कोई बेरियर क्रीम जरूर लगा लें अपने हाथों पर और चेहरे पर …जिसके रंग का रासायनिक प्रभाव यथा संभव कम किया जा सके…यदि बैरियर क्रीम उपलब्ध न हो तो सन स्क्रीन तो जरूर लगा लें …क्यों कि ये भी एक प्रकार की कोटिंग त्वचा पर करती है जिससे थोङा बहुत बचाव इससे भी किया जा सकता है …
  4. Hin_Holi_c-27चलो अब ये भी मान लें कि आप को किसी ने खूब रगङ के रंग लगाया है…..तो …होली खेलने के बाद चेहरे को साबुन के बजाय किसी  अच्छे से फैश वाश से धोयें….हो सकता है आप का रंग अच्छी तरह से साफ न हों पर फिर भी आपको रगङ के हरगिज इसे साफ नहीं करना है….क्यों कि इससे आपकी त्वचा को ज्यादा नुकसान होगा….वो रसायन जो अब तक आपकी त्वचा के ऊपर ही लगा हुआ था त्वचा मैं रगङ के साथ वो अंदर भी चला जायेगा और फिर पक्का ही रियैक्शन करेंगा…..

ये कुछ सावधानियां है जिनका ध्यान रखकर हम अपनी त्वचा को काफी हद तक सुरक्षित रख पायेंगे…..

6 comments:

Udan Tashtari said...

बढ़िया संदेश!!


ये रंग भरा त्यौहार, चलो हम होली खेलें
प्रीत की बहे बयार, चलो हम होली खेलें.
पाले जितने द्वेष, चलो उनको बिसरा दें,
गले लगा लो यार, चलो हम होली खेलें.


आप एवं आपके परिवार को होली मुबारक.

-समीर लाल ’समीर’

RaniVishal said...

Sahi salah
Holi ki hardik shubhkaamnae!!
http://kavyamanjusha.blogspot.com/

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत बढ़िया संदेश प्रस्तुति, रंग उत्सव होली की शुभकामनाये ....

Fauziya Reyaz said...

shukr hai koi to hai jo sirf tahwaar ki khushiyon ki nahi balki savdhaniyon ki bhi baat kar raha hai

सर्वत एम० said...

बन्धु, होली गुज़रे जमाना हुआ और आप आगे नहीं बढ़े. मैं तो देर क्या, बहुत देर से आया, फिर भी.
आप मेरे ब्लाग तक आए, पढ़ा (पता नहीं), कमेन्ट दिया, शुक्रिया.
आपने पूछा यह आँखें किसकी हैं और इन्हें देखकर ही मैं गजल कहता हूँ.
मेरी गजलें आपने पढ़ी नहीं, वरना यह सवाल शायद नहीं करते. अब इस उम्र में जब खुद मेरी आँखों चश्मे की मुहताज हैं, किसी की आँखें क्या देखूँगा.
अब तो लोग खुद मुझे आँखें दिखाते रहते हैं.

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

मिहिर जी, सुझाव तो उत्तम हैं, पर अब दिवाली के बारे में भी सोचिए, क्योंकि वह आने वाली है।
………….
ये ब्लॉगर हैं वीर साहसी, इनको मेरा प्रणाम

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