Thursday, August 30, 2007

एक्नी वाल्गारिस यानी पिम्पल्स उपचार


पिछले अंकों में मैंने एक्नि के उपचार के बारे में चर्चा की थी पर इसमें से एक औषधी हमने छोङ दी थी आइसो ट्रिटिनॉइन .यह एक चमत्कारिक औषधी है और सबसे गम्भीरतम Nodulo cystic acne में drug of choiceयानि सर्वोत्तम दवाई है .और मात्र 3 से 4 महिनों के उपचार में आशातीत परिणाम देती है पर इस औषधी के साथ कुछ समस्याएं हैं जैसे एक तो यह थोङी महंगी है इसका 1 महिने का कोर्ष हि करीब 1.5 से 2 हजार रूपये का होता है जो एक साधारण मरीज के बूते के बाहर की बात है ,दूसरे यह एक teratogenic drug है अर्थात यदि इसके देने के 1 वर्ष के भीतर गर्भ धारण होता है तो होने वाले बच्चे पर गम्भीर दुष्परिणाम हो सकते हैं इसलिए बहुत अधिक आवश्यक होने पर ही इसे काम लिया जाता है,और वह भी मरीज को पूरी तरह समझाकर कयों कि ऐसे में ईलाज बन्द करने के करीब एक वर्ष तक गर्भ धारण की कतई मनाही होति है.
इसके अलावा शुरू करने के करीब महीने भर में चेहरे की त्वचा,नाक ,आंख, आदि में सूखापन महसूस हो सकता है जिसे आसानी से क्रीम लगाकर ठीक किया जा सकता है .
थोङी मुश्किल औषधी होने के बाद भी यह अपने असर के कारण विषेशग्यों की पसन्दीदा औषधी है.
उपसंहार---
जो कि पिछली कुछ कङियों में हमने एक्नी या पिम्पल्स के बारे में जितना कुछ भी जाना इसका निष्कर्ष यही है कि पन्द्रह वर्ष की आयु में जब ये शुरु होति है तब से लेकर करीब पच्चीस वर्ष की उम्र तक ये निकल सकती हैं और आज तक उपलब्ध तमाम उपचारों से इसे मात्र नियन्त्रित ही किया जा सकता है .अब प्रश्न यह उठता है कि जब ये निकलनी ही हैं तो उपचार करने से क्या लाभ है , तो इसका सीधा जवाब ये है कि समय पर उपचार करने कम से कम उपचार द्वारा चेहरे को कुरूप होने से बचाया जा सकता है,नहीं तो हर बनने वाली फुंसी अपना एक निशान छोङ जाती है और धीरे धीरे सारा चेहरा खराब हो जाता है और यह सब कुछ सम्भव है बहुत कम खर्चे और परेशानी से .जरूरत है एक अच्छे सौन्दर्य विषेशग्य की.

Wednesday, August 29, 2007

अक्नी व्ल्गारिस --उपचार एक सामान्य चर्चा

एक्नी के बारे कारण के बारे में सामान्य जानकारी हमने प्राप्त की, इसके बाद अब हम इसके ईलाज के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे .
एक बार हम ईसके विभिन्न पहलुऔं पर नजर डाल लेते हैं ,
मरीज के चेहरे पर चिकनाई यानि सीबम की अधिकता होती
संक्रमण हो सकता है
कीलें और सूजन हो सकती ,जो की समय निकलने के साथ चेहरे पर निशान छोङ देती है ,
ईलाज मूख्यतः इन्ही बातों को ध्यान में रखकर किया जाता है .
एक्नी के ईलाज में प्रारम्भ में खाने और लगाने दोनों प्रकार की औषधियों का उपयोग किया जाता है.जिन्हें बाद में धीरे धीरे कम किया जाता है .
खाने की औषधियां---
एन्टिबायोटिक्स यथा डॉक्सीसाईक्लिन,एजिथ्रौमाईसिन,मिनोसाईक्लिन आदि .
अन्य औषधियां जैसे जो कभी कभी काम आती हैं पर बहुत उपयोगी होती हैं जैसे जिंक सल्फेटो,हार्म हार्मोन्स,दर्द निवारक,स्टीरॉयड्स आदि .
लगाने की औषधियां इस तरह की दवाईयों को हम तीन हिस्सों में बांट सकते ,
दवाईयां जो मुख्यतया कीलों पर काम करती हैं जैसे –एडॅपलीन(एडॅफरीन,डॅरिवा,मॅडापाईन )ट्रिटिनॉइन, (रेटिनॉ),एजिलिक एसिड,
दवाईयां जो मुख्यतया जीवाणु प्रतिरोधी होती हैं जैसे –बेन्जॉयल परॉक्साइड, एजिलिक एसिड, क्लिन्डामाइसिन,इरिथ्रोमाइसिन,टेट्रासाइक्लिन,इत्यादि.
दवाईयां जो मुख्यतया सुजन कम करती हैं. जैसे- ग्रुप 2 की सारी दवाईयां ये दुवाईयां और ग्रुप 1 से एङॅपलीन इन दवाईयों का एक काम संक्रमण और सूजन दोनों कम करना है .
कोष्ठक में दिये गये नाम इन दवाईयों के प्रचलित ट्रेड नेम हैं.
ये दवाईयां यहां मात्र परिचय के लिये दी गई हैं वास्तविक उपयोग के लिए हमें डॉक्टर से ही परामर्श करना चाहिए .
उपचार दो चरणों में किया जाता है .पहले चरण में फुंसियों को जल्दी से जल्दी नियन्त्रित करना जिससे कि संभावित स्कारिंग (निशान) कम से कम हों . और दूसरे बाद में कम से कम दवाईयों से इन्हें ठीक रखना,
चूंकि यह समस्या कई महिनों या सालों तक भी चल सकती है तो ईलाज चालू करने से पहले हम ये समझ लें कि यह कई महीनों तक भी खिंच सकता है तभी ईसका सही लाभ होता है .अक्सर हम लोग जैसे ही थो इन दवाईयों एक्नी ङा आराम आता है उपचार बन्द कर देते हैं इससे जब फिर से फुसिंयां जब बढती है तो हमें फिर से खूब सारी दवाईयां खानी पङती है,अन्यथा ऐकाध लगाने वाली दवाई से भी उपचार सम्भव है । औषधियां
क्यों कि पिम्पल्स एक सर्वसामान्य समस्या है इसलिए हमारे आस पास अनेक स्वायम्भू विशेषग्य मिल जायेंगे और ईसी लिए शायद इतनी सारी भ्रान्तियॉ प्रचलित हैं इनका निवारण भी अति आवश्यक है ।
खाने में कुछ विषेश लेने की या छोङने की आवश्यकता नहीं होती आप जैसा भी ले रहें हैं वैसा पौष्टिक भोजन लेते रहें.खासकर तली हुई चीजों के बारे में विषेश पूर्वाग्रह होता है जिनके खाने या छोङने से ज्यादा फर्क नहीं पङता .
बार बार मुंह धोने से फायदे की बजाय नुकसान ज्यादा होता है,
चेहरे पर दवाईयों के अलावा अन्य क्रीम वगैरा लगाने से परहेज करें ,क्यों कि चिकनाइ लगाने से फुसिंया बढती है .

Wednesday, August 22, 2007

एक्नी या pimples

अक्नी व्ल्गारिस के बारे में मैंने कहा था कि
यह समस्या उम्र के साथ चलति है 'तो हम ऐसा भी मान सकते हैं कि यह किसि तरह कि बिमारी न होकर मात्र उम्र के परिवतॅन का असर है'और निश्चित रुप से 'इसे खत्म नहीं किया जा सकता है बल्कि ईलाज से इसे हम सिर्फ नियन्त्रित ही कर सकते ; जब ये है कि इलाज से खत्म नहीं हो सकती ओर अगले ५-७ साल तक भी ये निकल सकति है तो ईलाज कि क्या आवश्यकता है॰ईलाज की आवश्कता तो फिर भि है क्यों कि यदि ईलाज नहीं लेंगे तो जो फुसिंयां हो रही हैं वे सब कि सब निशान छों,ङने के बाद ही ठीक होति हैं॰और जब तक ये निकलेंगी निशान छोङती जायेंगि .ओउर हमें इससे हमारा चेहरा खराब होने कि सम्भ्वाना बढ़ जाती है इसलिये हमें इलाज़ समय पर ही चालू कर देना चाहिऐ .जिससे हमारा चेहरा सुंदर बना रहे .ओर सबसे बड़ी बात ये है कि जो दवाईयां इसके लिए काम ली जाती हैं वो सौंदर्य प्रसाधन कि ह्बी तरह होती है .इसलिये शुरू से ही एक बात दिमाग में रखें कि हम इलाज़ नहीं बल्कि सौंदर्य परामर्श ले रहें हैं .ओउर ये मानसिकता रखना आवश्यक है क्यों कि लंबे समय तक इलाज़ लेना ही हमारे मन को बीमार कर देगा।
सबसे बड़ी भ्रांति जो पिम्प्लेस के इलाज़ में होति है कि मरीज़ के खाने पिने पर बहुत se प्रतिबंध लगा दिए जाते हैं जो एकदम गलत है .अचार खाना ,तली चीज़े नहीं खाना ,मसालेदार चीज़े नहीं खाना ,ये सब गलत है ओउर इन सब चीजों का बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं होता ,बल्कि मरीज़ परेशां होकर इलाज़ ही बन्द कर देता है.इसलिये किसी अच्छे स्किन स्पेसिअलिस्ट से सम्पर्क कर इन सब परेसनियों सेदूर रहते हुए आराम से इलाज़ लिया जा सकता है.अगले अंक में इलाज़ के प्रकारों पर चर्चा करंगे.

Tuesday, August 21, 2007

अक्नी व्ल्गेरिस

हिन्दि चिट्ठा संसार मे मैं अभी एक छोटे बच्चे कि तरह हूं और छोटे छोटे डग भरने कि कोशिश कर रहा हूं । में त्वचा रोग का चिकित्सक हूं और त्वचा से सम्बन्धित समस्याओं का ऍक चिट्ठा लिखना चाहता हूं में सोचता हूं कि इसकि बहुत आवश्यकता है ।क्यौं कि ईस तरह कि जानकारी अंग्रेजि में तो बहुत है पर हिन्दी पाठकों के लिए बङी दुलॆभ है में प्रयास करुंगा कि इस कमी को पूरा कर सकूं ।हो सकता है कि में बहुत अच्छा लेखक साबित नहिं होऊं पर मैं निश्चत ही उपयोगि जानकारी दे पाऊंगा ऐसा मेरा विश्वाश है । चूंकी चमॆ रोगों के बारे में भ्रान्तियां बहुत हैं और उपयोगी जानकारी बहुत कम मिल पाती है।यदि आप में से किसि पाठक की कोइ समस्या या दुविधा है तो याथासम्भव उसे दूर करने का प्रयास अवश्य करूंगा ।
शुरुआत हम करते हैं जवानि के दिनों कि सवॆसामान्य समस्या मुहांसे जिन्हें अंग्रेजि में पिंपल्स या जिसको मेडिकल कि भाषा में ऐक्नि वल्गेरिस कहते हैं ।इसमें चेहरे पर फुसिंया निकल आति हैं ,इनहें रोग कि गम्भीरता के अधार पर पांच ग्रेड में बांटा गया है। यह समस्या उम्र से सम्बन्धित है करीब १५ साल की वषॆसे लेकर २५ वषॆ तक चलति है । और सबसे बङी समस्या ये है कि हम इस तथ्य को स्वीकार नहीं कर पाते ।मुख्य रूप से हार्मोनल असन्तुलन इसके लिये जिम्मेदार होता है,ोपइसके अतिरिक्त भी कुछ जिवाणु जैसे प्रोपिओनो एक्निस ये जिम्मेदार होते हैं ।समस्या या दुविधा है तो याथासम्भव उसे दूर करने का प्रयास अवश्य करूंगा पर मैं निश्चत ही उपयोगि जानकारी दे पाऊंगा ऐसा मेरा विश्वाश है ।

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