Thursday, December 20, 2007

जाके पैर न फटी बिवाई -----

वो क्या जाने पीर पराई.फटी एङियों के बारे में जिस भी कवि ने ये पंक्तियां लिखी हैं सत्य है, क्यों कि फटी बिवाईयों का दर्द इतना ज्यादा होता है कि जब मेरी मां इनके उपचार के लिए पिघला मोम डालती थी चिरी हुई एङियों में तो वो जलन भी कम लगती थी, सर्दी के दिनों में एङी फटना एक सर्व सामानतय समस्या है.यदि इसका कारण और निवारण के बारे में थोङी जानकारी हो तो हम बङे आराम से इस समस्या पर पार पा सकते हैं सर्दी के मौसम में हमारी त्वचा की नमी और चिकनाई कम हो जाती हो और विषेशकर पांव की त्वचा, तो क्यों कि निरन्तर जमीन के संपर्क में रहने से और भी सूखनें लगती है और फटनें लगती है और फटी हुई त्वचा से जब मिट्टी आदि अंदर जाती है तो संक्रमण हो जाता है और दर्द होनं लगता है और उसी दर्द की अभिव्यक्ती ऊपर की गई हैकि जा के पैर न फटी बिव......... उपचार---- बीमारी आपके समझ आ गई तो उपचार भी उतना ही आसान है.चिकनाई या के नमी की कमी से एङियां फटी तो चिकनाई अर्थात moisturizers का उपयोग इसका उपचार है, इसलिए पैट्रोलियम जैली,खोपरे का तेल,कोल्ड क्रीम इत्यादि अनेकानेक चीजें इसके काम ली जातीहै.थोङी बहुत समस्या हो तो इन सब चीजों से बङे आराम से काम चल जाता है पर चीरे ज्यादा हों तो कुछ विशष उपचार करना चाहिए.सबसे पहले रोज रात में सोते समय नमक के पानी से पांव धोएं (एक लीटर पानी में एक चम्मच नमक डालकर पानी को गुनगुना कीजिए)धोना क्या पानी के अंदर पांव को पांच मिनिट तक रखना है अब जो चीरे हैं उनमें gentian violet, नामक एक दवा जो कि चार पांच रूपये में किसि भी दवाई की दुकान पर मिल जाती है.चूंकि यह द्रव पदार्थ है इसलिए चीरों के अन्दर तक जाकर संक्रमण को बङी ही सफाई से खत्म कर देता है.जिससे चीरे तुरन्त ही साफ होने लगते हैं. इसके बाद salicylic acid युक्त क्रीम जो कि बाजार में विभिन्न कंपनियों की dipsalic,trivate mf ,betnovate -s आदि अनेकानेक नामों से मिलती है ,फटी एङियों में बहुत अच्छा काम करती है यह पाँव की नमी को बनाए रखने के साथ साथ रूखी त्वचा को भी साफ करती है जिसत फटी एङियां नरम होती हैं और साफ होने लगती हैं.अब एक बार ये सब ठीक होने पर साधारण पैट्रोलियम जैली से भी एङियां साफ रह सकती हैं और जरूरत पङने पर वापिस का , सेलिसाइलिक एसिड युक्त क्रीम का प्रयोग किया जा सकता है. इस प्रकार इन साधारण उपायों से हम इस दर्द भरी समस्या से छुटकारा पा सकते हैं

Wednesday, December 19, 2007

पर्नियोसिस ---सर्दियों में अंगुलियों का सूजना

पूरा उत्तर भारत कङाके की ठंह की चपेट में आया हुआ है,इन दिनों में हाथ पांव की अंगुलियों और कई बार नाक और कान में सूजन आ जाती है और लाल होकर दर्द करने के साथ साथ तैज खुजली चलती है.लगते हैं,जिसे तकनीकी भाषा में perniosis कहते हैं.
कारण और लक्षण-क्यों कि उपरोक्त वर्णित अंग यथा हाथ पांव की अंगुलियां नाक का अंतिम सिरा,और कान का विशेषकर ऊपरी किनारा रक्तप्रवाह के हिसाब से अंतिम छोर होते हैं जहां रक्त का प्रवाह वातावरण में बदलाव की वजह से काफी प्रभावित हो सकता है,
वातावरण के तापमान में कमी की वजह से रक्तवाहिकाएं सिकुङती हैं और चूंकि हाथ पांव और मुंह ढके हुए नहीं होते तो ये बहुत जल्दी इस सबसे प्रभावित होते हैं,और प्राणवायु अर्थात ऑक्सीजन की कमी से अंगुलियों में और नाक कान मैं तेज दर्द खुजली और सूजन और ललाई जाती है.और यह सब इतना असहनीय हो जाता है कि कइ बार बुरी तरह से रोता हुआ पहुंचता है.ज्यादा दिन यदि उपचार नहीं किया गया तो फिर घाव बनने लगते हैं.और संक्रमण भी हो सकता है,
उपचार व सावधानियां- सबसे बङा उपचार तो बचाव ही है.शरीर को तेज सर्दी के समय सूती या ऊनी जुराब और मफलर से ढका हुआ रखा जाये,गृहिणियां घर का काम करते समय गुनगुना पानी काम मे लें.यदि फिर भी हो जाये तो शाम को सोते समय एक लीटर पानी में एक चम्मच नमक डालकर गुनगुना कर लें और पांव को पांच मिनिट के लिए रखे और तौलिये से पोछकर फिर गुनगुने तेल की मालिश कर जुराब पहन लें,
• कुछ औषधियां इसमे बहुत कारगर होती है जैसे nifedipine जो कि प्रमुखतःउच्च रक्तचाप की औषधी है और रक्तवाहिकाओं में हल्के फैलाव के द्वारा काम करती है perniosisमें बहुत कारगर है.
• Pentoxiphylline-यह उतकों में लाल रक्त कणिकाओं को प्रवेश करने में मदद करती है, और बहुत ही प्रभावी है.
ध्यान रहे कि औषधियां सिर्फ योग्य चिकित्सकर की देख रेख में ही ली जायें

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