Monday, October 22, 2007

सर्दी के मौसम में त्वचा की सामान्य देखभाल

सर्दी का मौसम प्रारम्भ हो रहा है,कुछ विशेष प्रकार की समस्याएं इस मौसम में होती है.यदि पहले से ही कुछ सावधानी बरती जाए तो हमारी सर्दी भी सुहानी हो सकती है.प्रमुख रूप से निम्नांकित समस्याएं त्वचा में सर्दी के साथ प्रारम्भ होती है

  • एङी फटना
  • त्वचा का सूखना
  • सूर्य के प्रकाश से एलर्जी(photodermatitis)
  • रूसी(dendruff)

इनमें से हम एक एक कर इन समस्याओं के बारे में बात करेंगे.एङी फटने के बारे में हम पिछली पोस्ट में बात कर चुके हैं आशा है कुछ लोगों को इससे अवश्य ही लाभ होगा.आज हम सूखी तव्चा देगे xerosis के बारे में जानेंगे.

सितंबर के अंत से अक्टूबर के प्रारंभ तक कभी भी सर्दी का मौसम प्रारंभ हो सकता है,और जैसे ही वातावरण में हल्की सी भी ठंडक आने लगती हैत्वचा की चिकनाइ या नमी कम होने लगती है संभवतया मौसम के रूखे पन से ये संभव है,एक त्वचा विग्यानी होने के नाते में ये जानता हूं के सर्दी के प्रथम सप्ताह में ही किसी भी चर्म रोग चिकित्सक के पास पहुंचने वाले मरीज त्वचा के रूखे पन से परेशान होते हैं.इसके कारण फटी फटी सी लगती है,लाल हो जाती है, और जलन होने लगती है.कई बार खूजली करते करते मरीज बेहाल हो जाता है और इससे संक्रमण हौ फोङे फुसिं भी बन सकते हैं.छोटे बालकों में और खासकर जिनके ATOPY अर्थात  ALLERGY की समस्या रहती है उनमें तो ये बहुत ही गंभीर रूप से होती है.

उपचार--सामान्यतया हम इसे खुजली की समस्या मान लेते हैं और अधिकतर फैमिली फिजिशियन भी इसे इस रूप में ही देखते हैं,और  उपचार करनें का प्रयास करते हैं.त्वचा के रूखे पन की समस्या साधारण MOISTURISERS यथा PETROLRUM JELLY,GLYCERIEN, आदि चीजों से बङी आसानी से ठीक हो सकती हैं.कुछ सावधानियां जो लगाने के समय ध्यान रखनी चाहिए जैसे नहाने के बाद शरीर को तौलिये से ज्यादा न रगङें बल्कि हल्के हाथ से pet dry करें,जिससे कुछ नमी त्वचा में बाकी रहे.पैट्रोलियम जैली यथा वैसलीन जैसे पदार्थ त्वचा पर एक परत बना देते हैं जिससे नमी और चिकनाई शरीर पर बनी रहती है.GLYCERIENजैसे पदार्थ hygroscopic होते हैं जो त्वचा में उपलब्ध पानी के साथ जुङकर पानी को अधिकाधिक समय तक तव्चा में बनाए रखते हैं.

चेहरे पर लगाते समय सावधानी रखें कि चिकनाइ वाली चाज न लगाकर प्रकृति वाली 15 से 25 वर्श की उम्र में क्यों कि मुंहांसे होने का भी डर होता है इसलिए कम चिकनाई वाली चीज जैसे कोल्ड क्रीम का उपयोग करना चाहिए.और फिर भी यदि लगे की थोङी बहुत फुंसियां जैसी निकल रही है तो किसी तव्चा विषेशज्ञ से बात करनी चाहिए,

ध्यान रहे की यहां मैं जो भी बता रहा हुं वे सब सामान्य उपाय हैं जिनसे हम लाभ उठा सकते हैं यदि कुझ ज्यादा ही समस्या है तो विशेषज्ञ से निश्चित ही मिलें,कोई भी मॉश्चराइजर काम लें पर ध्यान रखें कि जहां ठीक ठाक ठण्ड पङती है वहां दो तीन महीने कम से कम लगाना पङता है इसलिये ज्यादा महंगा नहीं हो,ज्यादा सुगंध वाला नहीं हो अन्यथा एलर्जि शुरु हो जाती है,और नहाने के तुरंत बाद ईसे लगावें क्यों कि तब त्वचा में उपस्थित नमी  ही हमें लंबे समय तक ईस समस्या से बचाती है. आने वाली कङियों में हम उपर लिशी अन्य समस्याओं के बारे में बात करें यदो इसके बारे में कुछ और जानकारी करनी है तो आप मुझ मेव कर सकते हैं.

3 comments:

अनुनाद सिंह said...

बहुत ही सामयिक और उपयोगी लेखा लिखा है, आपने। साधुवाद!
अच्छा रहता कि आप कोई सस्ता किन्तु प्रभावकारी नमीप्रदाता(म्वायस्चराइजर) का नाम भी बता देते।

आगे की कड़ियों का इन्तजार है।

Udan Tashtari said...

ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी. जारी रहें. बहुत काम आयेगा. शुभकामना.

Dr D.P Rana said...

बहुत ही अच्छी जानकारी दे रहे है आप श्रीमान जी ,
मै भी कुछ इसी तरह का कार्य कर रहा हुँ बस रास्ते अलग अलग हैं , यानि मै आयुर्वेदिक तरीके से समाज का कल्याण करने की कोशिश कर रहा हुँ आपका बहुत बहुत धन्यवाद । मेरे ब्लोग पर भी जरुर पधारें ।
http://jivayurveda.blogspot.com/2009/12/blog-post.html

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