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स्ट्रैच मार्क्स-कारण ,बचाव व उपचार

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अत्यधिक शारिरिक श्रम जैसे बहुत कम समय में ज्यादा कसरत करना .आपके शरीर के वजन में अचानक बदलाव ,और प्रिगनेंसी में स्ट्रैच मार्कस बन जाना एक बहुत ही सामान्य बात है.पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में ये ज्यादा होते है,एक बार होने के बाद ये हमारी एकदम साफ त्वचा पर बङा ही भद्दा सा निशान बना देता है विशेषकर महिलाओं में डिलीवरी के बाद ये पेट पर गंदे से निशान से दिखाई देते हैं जिससे उन्हें अपनी पसंद के कपङे पहनने में भी परेशानी होती है. kकारण कुछ भी हो पर इस तरह के निशान आपके शरीर पर कोई अच्छा प्रभाव नहीं छोङते हैं,,दिखने में भद्दे होते हैं.. कई बार ये घाव भी कर सकता है क्यों कि वहां पर त्वचा थोङी हल्की और पतली हो जाती है होती है..पर अब  आधुनिक तकनीकी की मदद से हम इन्हें काफी हद तक साफ करने में सफल हो जाते है... क्या होते हैं स्ट्रैच मार्क्स-  ये एक तरह से त्वचा में अत्यधिक खिंचाव से होने वाली स्कारिंग होती है जिसमें त्वचा पूरी तरह से फटने की जगह थोङा गहराई में खिंच जाती है.विशेष रुप से एपिडर्मिस के नीचे स्थित डर्मिस जो कि त्वचा की वो सतह होत है जो कि हमारी त्वचा को आधार देती है और हमारी त...

लैजर टैटू रिमूवल-

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टैटू एक फैशन ट्रेंड है आजकल बहुत सारे लोग टेटू बनवाते हैं ये बहुत सुंदर भी लगते हैं पर कई बार जब हम इससे बोर हो जाते हैं तो हम चाहते हैं कि इसे साफ किया जाये..इसके अलावा विशेष रूप से फौज की जो भर्तियां होती हैं उनमें भी यदि आप के टैटू है तो आप को अयोग्य घोषित किया जा सकता है इसके अतिरिक्त यदि आप गल्फ कंट्रीज में याने सऊदी या दुबई जाते हैं तो भी कई बार ये आपके लिए परेशानी करता है तो कई लोग इसके लिए भी टैटू साफ करवाने के लिए आते हैं..लैजर से टैटू हटाने के बारे में हमारे कई सारे प्रश्न होते हैं उन्ही का उत्तर हम यहां दे रहे हैं.. टैटू साफ करने के लिए कौनसी मशीन काम आती है,और कैसे काम करती है- टैटू हटाने के लिए q switch Nd Yag laser काम आती है.इससे निकलने वाली लैजर किरण टैटू में उपस्थित काले रंग या काली स्याही को लक्ष्य करती है.लैजर से निकलने वाली ऊर्जा को ये काला रंग या स्याही के कणों को बहुत छोटे छोटे टुकङों में तोङ देती है जो कि शरीर में अवशोषित कर इसे तोङ देती है, जो धीरे धीरे हमारे blood circulation के साथ बहकर साफ होती जाती है. टैटू साफ होने में कितना समय लगता है- टैटू रिमूवल कब और...

fractional co2 laser- कुछ जो आप जानना चाहें

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यदि आप के जीवन में कभी पिंपल्स हुए हैं तो उनके निशान आपके जाब के इंटरव्यू हो या आपकी सगाई होने वाली हो एक आत्महीनता का बोध आप में जगा देता है...इसके निशान जब भी आप दर्पण में देखते हैं तो आपके स्मार्ट लुक को थोङा सा बिगाङ सकता है।।पर सौभाग्य से आजकल ऐसे ट्रीटमैंट्स अपने पास हैं जो आपके चेहरे को इन भद्द निशान और स्कार से वापिस मुक्त कर सकते हैं और आप का चेहरा फिर से खिलखिला उठता है ..और ऐसा ही एक ट्रीटमैंट है co2 fractional laser जो कि आपकी त्वचा की डेमेज्ड बाहरी सतह जो कि स्कार युक्त है उसे हटाकर फिर से ताजगी और चमक प्रदान करता है।तो आज हम बात कर ने वाले हैं इसी ट्रीटमैंट के बारे में ये कैसे किया जाता है और किस तरह ये काम करता है।।इसके हानि लाभ और ट्रीटमैंट करने के बाद कौनसी साबधानियां आपको रखनी चाहिये.. १-क्या होती है फ्रैक्शनल कार्बन डाई आ्क्साईड लैजर f ractional co2 लेजर रिसर्फेशिंग एक प्रकार का स्किन ट्रीटमैंट होता है जो आपके एक्नी स्कार ,डीप रिंकल्स और अन्य स्किन इरेगुलरिटीज  जो किसी भी प्रकार के स्कार यथा एक्नी,पोस्ट ट्रामेटिक स्कार याने चोट लगेन के बाद होने वाले स्कार और स्ट्...

एक्नी या पिंपल्स -जानिये क्यों और कैसे होती है

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                                                     एक्नी जिससे हम जवानी के फुंसियां कह कर संबोधित करते हैं 15-25 साल के बीच में निकलने वाली चेहरे पीठ और छाती पर निकलने वाली वो फुंसियां होती है जो इतने लंबे समय तक निकलती है। और हमें काफी परेशान कर सकती है।अपने जीवन काल में 80 प्रतिशत तक टीनेजर्स  एक्नी से प्रभावित होते हैं और इनमें से अधिकतर को उपचार लेने की आवश्यकता पड़ती है। यदि समय पर इसका उपचार नहीं किया जाता है तो यह आपके चेहरे पर निशान  कर सकती है।और ये परमानेंट भी हो सकते हैं।इसलिए एक्नी होने पर हमें विशेषज्ञ चिकित्सक से इसके बारे में ध्यान से उपचार ले ही लेना चाहिये जिससे हम अपने चेहरे को इसके हानिकारक प्रभावों से बचा सकें.आज हम एक्नी के होने के कारणों की चर्चा करेंगे. प्रभावित करने वाले कारक- हालांकि हम ये कह सकते हैं कि ये 80 प्रतिशत तक युवाओं को होती है तो ये कोई बीमारी न होकर एक सामान्य शारिरिक परिवर्तन ही है फिर भी कई सारी बातें ह...

गर्मी के मौसम में त्वचा की देखभाल

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  राजस्थान के जिस हिस्से से मैं हूं याने सीकर वो हिस्सा सर्दी और गर्मी दोनों में ही अपनी सीमाओं को छूता है याने अभी जून आने वाला है,      और तापमान 50 तक पहुंच रहा है।ऐसा ही हाल। कमो बेश पूरे देश में रहता है ऐसे  में हम अपनी त्वचा और सामान्य स्वास्थ्य की रक्षा कैसे  कर पायेंगे इस के बारे में हम चर्चा करेंगे। कपङे कैसे पहनें- गर्मी में पसीना बहुत आता है तापमान ज्यादा होता है इसलिए कहीं घर से बाहर निकलना है तो सूती हवादार कपङे पहनने चाहिये। जहां क हो सके जींस वगैर नहीं पहने ं क्यों कि हवा दार नहीं होंगे तो हमारे शरीर की गर्मी और पसीना हमें परेशान कर सकता है।कपङों के रंग का भी इस पर बहुत फर्क पङता है .हल्के रंग के कपङे यथा सफेद रंग ऊर्जा को कम अवशोषित करता है और परावर्तित कर देता है पर गहरे रंग के कपङे जैसे काला रंग ऊर्जा याने गर्मी को अवशोषित कर बढा देता है।तो हमें श्वेत वस्त्र गर्मी से बचाते हैं और थोङे ढीले कपङे होते हैं तो वे गर्मी को शरीर तक पहुंचने से रोकते हैं।यदि दोपहर में आपको बाहर जाना पङे तो आपको निश्चित ही छतरी या हैट जो चारों तरफ से धूप...

अनचाहे बाल कारण व निवारण

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 अनचाहे बाल आधुनिक युग की एक ऐसी समस्या बन चुकी है जो कि किसी भी व्यक्ति विशेषकर महिलाओं की सुंदरता पर एक धब्‌बे की तरह होती है।और कोई नहीं चाहेगा कि चेहरे पर बाल हों और उनको पुरुषों की तरह हटाना पङे. कारण- अनचाहे बालों का एक बहुत बङा कारण आनुवंशिक होता है यदि आपके परिवार में बाकि महिलाओं के चेहरे पर बाल  हों तो आपके अनचाहे बालों की संभावना अधिक होती है.जिसमें साथ में पोलिसिस्टिक ओवेरियन डीजीज व पुरुष होर्मोंस का बढा हुआ स्तर../ये सामान्यतया पाया जाता है।ऐसी महिलाओं में न केवल चेहरे पर बल्कि शरीर के बाकि हिस्सों पर भी बाल पाये जा सकते हैं।जैसे निपल्स के पास पेट के बीच वाली लाईन व कई बार पांवों पर भी मोटे बाल पाये जा सकते हैं। हमारी बदली हुई जीवन पद्धति का भी इसमें बहुत बङा रोल है.हर काम चाहे वस्त्र धोना हो या कहीं जाना हो सब मशीन से होता है और हमारा शारिरिक श्रम बहुत कम होता है जिस कारण से न केवल वजन बढ जाता है बल्कि हार्मोनल अंसुतलन भी हो जाता है. अनचाहे बालों का उपचार एक बार अनचाहे बाल आ जाने पर उन्हें हटाना ही उनका उपाय है उसके साथ में बचाब के उपचार कर सकते हैं पर जो बाल आ ...

दाद याने फंगल इंफेक्शन के बार बार होने से कैसे बचें

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आज हम बात करेंगे फंगल इंफेक्शन यानी दाद की रिकरैंस याने बार बार होने के बार में यह कैसी समस्या बन चुकी है कि पूरे देश भर में एक तरह से एपिडेमिक बन चुका है आपको हर घर परिवार में मोहल्ले में गांव में सब जगह दाद याने फंगल इंफेक्शन के मरीज मिलते हैं और इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि हम दवाई लेते हुए भी कुछ चीजों का भली प्रकार से पालन नहीं करते इस वजह से यह सब होता है तो अब आज कुछ ऐसी बातों की चर्चा करेंगे जिन्हें ध्यान में रखकर हम इस समस्या से पार पा सकते हैं और दाद को ठीक कर सकते हैं। स्वच्छता पहली चीज है हमारे शरीर की स्वच्छता याने हाइजीन वैसे तो सभी लोग अच्छी तरह से नहाते हैं, साबुन लगाते हैं। पर कुछ चीजें फिर भी हमें ध्यान रखनी होती है जैसे कि यह इंफेक्शन स्पर्श से फैलता है। तो, इसके लिए जब हम नहाते हैं तो तौलिए से पौंछते समय ध्यान रखें कि हमें दो तरह के तोलिए काम में लेने चाहिए एक जो आपके सारे शरीर को पौंछते के लिए होता है चेहरे को पहुंचने के लिए होता है और दूसरा वह जो आपके इंटीमेट पार्टस यानी के ग्रॉइन एरिया यानी हाथों में और कांख में पौंछने लिए होता है। क्योंकि फंगल इनफेक्शन ज्...
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टीनिया वर्सिकलर( Tinea versicolor ) परिचय -टीनिया वर्सिकलर अथवा जिसे साधारण भाषा में भभूती कहते हैं,त्वचा का एक ऐसा रोग है जिसमें सफेद और भूरे रंग के चकत्ते हमारे शरीर पर बन जाते हैं,ये मुख्यतया धङ ,हाथ व कभी कभी चेहरे पर भी पाये जा सकते हैं।अपने रंग की वजह से जो कि सफेद से मिलता जुलता हो सकता है रोगी इसे सफेद दाग याने vitiligo समझ लेता है।और अधिकतर इसी वजह से चिकित्सक तक पहुंचता है।हालांकि इनके कारण ,गंभीरता और उपचार में रात दिन का अंतर होता है। कारण -ये रोग हमारे शरीर पर सामान्यतया पाये जाने वाले फंगस mellasezia furfur or pityriosporum ovale (एक ही फंगस के दो नाम हैं)के कारण होता है। लक्षण -शरीर पर विभिन्न आकार के   गोल गोल चकते जो कि कुछ मिलिमीटर से कुछ सैटीमीटर तक हो सकते हैं अन्य कोई लक्षण नहीं होता है।क्यों कि ये फंगस त्वचा की सबसे ऊपरी याने superficial परत stratum corneum मैं पाया जाता है इसलिए इससे खुजली नहीं होती और न हीं किसी प्रकार का द्रव निकलता है क्यों कि ये परत निर्जीव होती है।सामान्यतया गर्मी और बरसात ऋतु में ये ज्यादा होता है,क्यों कि तब शरीर पर प...

चिकन पोक्स (chicken pox)

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चिकन पोक्स एक बहुत ही संक्रामक बीमारी है  जो कि varicella zoster नामक विषाणु(virus) के संक्रमण से होता है.जिसमें छोटे छोटे छाले(vesiclec) पूरे शरीर पर बन जाते हैं,जो कि विभिन्न् रूपों मैं हो सकते हैं जैसे छोटे छाले.लाल दाने(papules),खुरंट(scab) इत्यादि..ये विषाणु दो प्रकार की बीमारियां हमारे शरीर मैं कर सकता है.चिकन पोक्स और herpes zoster.चिकन पोक्स को   जिसे भारत मैं विभिन्न नामों से जाना जाता है,जैसे छोटी माता,अचबङा इत्यादी .  संक्रमण का तरीका - विषाणु अति संक्रामक हो ता है.तथा किसी संक्रमित व्यक्ति के उच्छ्वशन मैं निकली वायु के अंदर उपस्थित जल कणों(droplet infection) के अंदर  ये  उपस्थित होते हैं.और ऐसें मैं रोगी अपने आसपास आनेवाले किसी भी व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है.  इसके अलावा ये मरीज के शरीर पर उपस्थित खुंरट या छालों में उपस्थित पानी के संपर्क मैं आने से भी संक्रमित हो सकता है.पर उच्छवसित वायु मैं उपस्थित विषाणु ही मुख्य रूप से चिकन पोक्स को फैलाने के लिए जिम्मेदार होता है. लक्षण- 5 से 9 वर्ष तक के बच्चे सबसे ज्यादा  संक्रमित होते हैं...

एकने व्ल्गेरिस --ऊपचार +सामान्य chaarcha

एक्नी के बारे कारण के बारे में सामान्य जानकारी हमने प्राप्त की, इसके बाद अब हम इसके ईलाज के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे . एक बार हम ईसके विभिन्न पहलुऔं पर नजर डाल लेते हैं , मरीज के चेहरे पर चिकनाई यानि सीबम की अधिकता होती संक्रमण हो सकता है कीलें और सूजन हो सकती ,जो की समय निकलने के साथ चेहरे पर निशान छोङ देती है , ईलाज मूख्यतः इन्ही बातों को ध्यान में रखकर किया जाता है . एक्नी के ईलाज में प्रारम्भ में खाने और लगाने दोनों प्रकार की औषधियों का उपयोग किया जाता है.जिन्हें बाद में धीरे धीरे कम किया जाता है . खाने की औषधियां--- एन्टिबायोटिक्स यथा डॉक्सीसाईक्लिन,एजिथ्रौमाईसिन,मिनोसाईक्लिन आदि . अन्य औषधियां जैसे जो कभी कभी काम आती हैं पर बहुत उपयोगी होती हैं जैसे जिंक सल्फेटो,हार्म हार्मोन्स,दर्द निवारक,स्टीरॉयड्स आदि . लगाने की औषधियां इस तरह की दवाईयों को हम तीन हिस्सों में बांट सकते , दवाईयां जो मुख्यतया कीलों पर काम करती हैं जैसे –एडॅपलीन(एडॅफरीन,डॅरिवा,मॅडापाईन )ट्रिटिनॉइन, (रेटिनॉ),एजिलिक एसिड, दवाईयां जो मुख्यतया जीवाणु प्रतिरोधी होती हैं जैसे –बेन्जॉयल परॉक्साइड, ए...

होली खेलते समय कुछ ध्यान देने योग्य बातें….

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  कैमिकल रंगों से होली नहीं खैलनी चाहिये …ये आपको तो पता है पर जरूरी थोङी है सामने वाले को भी पता है….यहां कुछ छोटी छोटी सामान्य सावधानियां है जिनसे हम होली के बाद अपनी त्वचा को काफी हद तक सामान्य रख पा सकते हं… जहां तक हो सके कैमिकल से बने रंगों का प्रयोग न करें….क्यों कि ये सामने वाले के साथ साथ आपकी त्वचा को भी नुकसान पहुंचा सकता है…. यथासंभव अपने बालों मैं तेल लगाकर रखें( आप छछूंदर न सही पर चमेली का तेल तो लगा ही सकते है ) ….क्यों कि तेल लगे हुए बाल अपेक्षाकृत रंग कम पकङते हैं और बाद मैं धोने मैं आसानी रहती है…. यदि संभव हो सकें तो अपने चर्म रोग विशेषज्ञ से पूछकर ( बिना फीस वाला )कोई बेरियर क्रीम जरूर लगा लें अपने हाथों पर और चेहरे पर …जिसके रंग का रासायनिक प्रभाव यथा संभव कम किया जा सके…यदि बैरियर क्रीम उपलब्ध न हो तो सन स्क्रीन तो जरूर लगा लें …क्यों कि ये भी एक प्रकार की कोटिंग त्वचा पर करती है जिससे थोङा बहुत बचाव इससे भी किया जा सकता है … चलो अब ये भी मान लें कि आप को किसी ने खूब रगङ के रंग लगाया है…..तो …होली खेलने के बाद चेहरे को साबुन के बजाय किसी...

vitiligo याने सफेद दाग एक सामान्य जानकारी

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सफेद दाग जिसे की आयुर्वेद मै श्वेत कुष्ठ के नाम से जानते है एक ऐसी बीमारी है जिससे कोई भी व्यक्ति बचना चाहेगा..इस बीमारी मैं व्यक्ति की त्वचा पर सफेद चकते बनने प्रारंभ हो जाते है ..और कई वार यह पूरे पूरे शरीर पर फैल जाती है…..वैसे विटिलिगो नामक इस बीमारी का कुष्ठ रोग से कोई लेना देना नहीं है.जहां कुष्ठ रोग का प्रमुख लक्षण ही त्वचा मैं संवेदना खत्म होना या सूनापन होना होता है…वहीं त्वचा मैं से रंग का अनुपस्थित होना कभी कभार ही होता है बल्कि अधिकतर बार त्वचा सामान्य रंग की ही होती है…… definition-vitiligo is an acquired idiopathic disorder characterized by circumscribed depigmented macules and patches.functional melanocytes disappear from involved skin by a mechanism that has yet not been defined. अर्थात विटिलोगो एक ऐसी व्याधी हे जिसमें शरीर पर एकदम सफेद चकते बन जाते है ये चकते त्वचा मैं मिलेनोसाईट्स जो कि त्वचा मैं रंग बनाने के लिए जिम्मेदार होते है उनकी अनुपस्थिति की वजह से होती है पर मिलेनोसाईट्स क्यों त्वचा से अनुपस्थित होती है इसके बारे मैं अलग अलग सिद्धांत जरूर हैं पर अधिकारिक ...

सोरायसिस(psoriasis)

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विश्व की कुल जनसंख्या का करीब 1 प्रतिशत लोग सोरायसिस से पीङित हैं,इस लिहाज से देखा जाये तो हमारे देश की कुल जनसंख्या का लगभग 1 प्रतिशत याने 1 करोङ लोगों को सोरायसिस है. सोरायसिस के बारे में जानना ही इसका आधा उपचार है यदि आप इस रोग के बारे में जानते हैं तो आधा उपचार तो आप स्वयं ही कर सकते , कि सामान्य जानकारी के लिए इसकी गहराई में जाना आवश्यक नहीं है यहां हम केवल उन चीजों के बारे में बात करते हैंजो एक सामान्य रोगी के लिए जानना आवश्यक है्. लक्षण - most characteristically lesions are chronic sharply demarcated dull red scaly plaques particularly on the extensor prominence and scalp. अर्थात रक्तिम ,छिलकेदार ,निशान जो के आस पास की त्वचा पर अलग से दिखाइ देते हैं,ये सिर अलावा extensor surface जैसे कोहनी ,और घुटने की तरफ पूरे पाव में और कमर पर अधिकतर मिलते हैं . इनका आकार 2-4 मिमि से लेकर कुछ सेमी तक हो सकता है ,सिर में ये रूसी के गंभीरतम रूप की तरह दिखाइ देते हैं, सोरायसिस यदि एक बार हो गया तो बह फिर जीवन भर चल सकता है .विज्ञान के इतने विस्तार के बाद भी अभी तक कोइ दवाई ऐसी नहीं बनी जो ...